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Lockdown Vyatha : Poems of 10 Poets on Coronavirus & Lockdown: लॉकडाउन व्यथा : कोरोना एवं लॉकडाउन की त्रासदियों पर10 कवियों की कविताएं (Hindi Edition)

Price: ₹ 76.00
(as of Jun 19,2021 06:19:46 UTC – Details)


“लॉकडाउन व्यथा” काव्य संग्रह के बारे में
कोरोनावायरस के कारण दुनिया भर में अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हुआ लेकिन भारत में लागू अत्यंत कठोर लॉकडाउन के कारण देश ने तबाही और त्रासदी का जो मंजर देखा उसने आजादी के समय के हुए विस्थापन की पीडा की याद दिला दी। इस लॉकडाउन के कारण करोडो मजदूर बेरोजगार और बेघर हो गए और उनके सामने खाने के लाले पड गए। भूख से बचने के लिए करोडों मजदूरों ने मजबूरन नंगे पांव और भूखे–प्यासे गांवों की ओर रूख किया। इस दौरान अनेक मजदूरों की जान गई।
इन मजदूरों और गरीबों की बेबसी और व्यथा ने पूरे समाज को झकझोक दिया। समाचार पत्रों से लेकर सोशल मीडिया पर मजदूरों की पीडा को तरह–तरह से किया गया। कवियो ने लॉकडाउन के दौरान की स्थितियों को अपनी कविताओं के जरिए अभिव्यक्त किया। इस काव्य संग्रह में देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले १० कवियों की कविताओं को शामिल किया गया है जिनके जरिए न केवल आज की पीढी बल्कि आने वाली पीढियां लॉकडाउन के समय की त्रासदियों को जान सकेगी।
इस संग्रह में जिन कवियों की कविताओं को शामिल किया गया है उनमें नताशा, बसंती सामंत, पूनम सिंह, संगीता ठाकुर, डा़ रमेश कुमार निर्मेष, आलोका कुजूर, अरविन्द कुमार सिंहानिया, अभिनव शरण ‘अंकुर’ उपेन्द्र कुमार और दिलवंत कौर शामिल हैं। इसका संकलन एवं संपादन किया है विनोद विप्लव ने। इनमें जिन कवियों की कविताएं हैं वे सभी देश के विभिन्न प्रांतों में रहते हैं और इन्होंने कोरोना संकट और लॉकडाउन के दौरान की स्थितियों एवं मजदूरों की व्यथा को अपनी कविताओं में समाहित किया है। यह संभवत कोरोनावायरस के संकट एवं लॉकडाउन की स्थितियों पर लिखी गई कविताओं का पहला संग्रह है जो अब आपके समक्ष पेश है।

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